Class 10 Physics Chapter 3 Notes in Hindi | विधुत (Electricity) Best notes in Hindi  

BSEB Class 10 Physics Chapter 3 Notes in Hindi | NCERT Best notes in Hindi | विधुत (Electricity) Best notes in Hindi 

यह पोस्ट हम आपके लिए लाए हैं | Class 10 Physics Chapter 3 Notes in Hindi | जो आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है | दोस्तों इस Chapter का नाम विधुत (Electricity) है | विद्युत पाठ से संबंधित लगभग सभी पॉइंट्स परिभाषा के द्वारा परिभाषित किया गया है | यह पोस्ट दसवीं के विद्यार्थी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है | जिसे आप पढ़कर कम से कम समय में अच्छा तैयारी कर सकते हैं और परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो सकते हैं | आप Class 10 Physics Chapter 3 का pdf भी डाउनलोड कर सकते हैं | Class 10 Physics Chapter 3 Notes in Hindi | 

Class 10 Physics Chapter 3 Notes in Hindi

विद्युत परिपथ :- 

किसी विद्युत धारा के सतत एवं बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं | 

  • विद्युत धारा का S.I मात्रक एंपियर होता है और इसे ऐमिटर से मापा जाता है | विद्युत धारा अदिश राशि है | 

विद्युत धारा :- 

आवेशों के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं |  एवं विद्युत धारा को एकांत समय में किसी विशेष क्षेत्र से प्रवाहित आवेश के परिमाण द्वारा व्यक्त किया जाता है | 

         यदि किसी चालक की किसी अनुप्रस्थ काट से समय t  में Q  आवेश प्रवाहित होता है | तब उस अनुप्रस्थ काट से प्रवाहित विद्युत धारा i को निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है | 

I = QT

Note :- विद्युत आवेश का मात्रक “ कूलम्ब” है जो लगभग 6*1018 इलेक्ट्रॉन के आवेश के तुल्य होता है | एवं विद्युत धारा का मात्रक “ एंपियर” है | इसका नाम फ्रांस के वैज्ञानिक आंद्रे मैरी एम्पीयर के नाम पर है | 

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1 एंपियर की परिभाषा :- 

किसी परिपथ में चालक से अंदर से 1 कूलॉम आवेश एक सेकंड में प्रवाहित हो तो उत्पन्न होने वाली धारा 1 एंपियर होती हैं | 

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विद्युत विभव :- 

एकांक धन आवेश को अनंत से विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य विद्युत विभव कहलाता है |  इसे V  से दर्शाते हैं | 

V=WQ

विद्युत विभवांतर :- 

दो बिंदुओं के बीच किसी विद्युत विभवांतर को उस कार्य द्वारा परिभाषित किया जाता है जो एकांक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक लाने में किया जाता है | 

  • विद्युत विभवांतर का मात्रक “वोल्ट” है | 
V=WQ

1 वोल्ट :- 

यदि किसी विद्युत धारावाही चालक के दो बिंदुओं के बीच एक कूलॉम आवेश को प्रवाहित करने पर एक जूल कार्य किया जाता है | तो उन दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट होता है | 

Note :- विभवांतर का मापन “वोल्टमीटर” द्वारा किया जाता है |इसे सदैव समांतर क्रम में जोड़ा जाता है |

विद्युत परिपथ आरेख :- 

विद्युत परिपथो में समान्यतया उपयोग होने वाले कुछ अवयवों के प्रतीक :- 

ओम का नियम :- 

यदि किसी चालक तार की भौतिक अवस्थाए लंबाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, ताप, दाद आदि स्थिर रहे | तो उस तार के शेरों के बीच उत्पन्न विभवांतर विद्युत धारा के समानुपाती होती हैं | इसे ओम का नियम कहते हैं | 

  V ∝ I
  V= IR  

जहां R नियतांक जिसे प्रतिरोध R कहते हैं |प्रतिरोध विद्युत धारा के मार्ग में रुकावट डालने का कार्य करता है |  इसका मात्रक ओम होता है | 

R=VI

1 ओम :- 

यदि किसी चालक के दोनों सिरों के बीच विभवांतर 1 वोल्ट है तथा उससे 1 एंपियर विद्युत धारा प्रवाहित होता है | तो उस चालक का प्रतिरोध एक ओम होगा |   

1ओम= 1 वोल्ट1 एंपियर

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परिवर्ती प्रतिरोध :- 

स्रोत की बुलेट ता में बिना कोई परिवर्तन किए परिपथ की विद्युत धारा को नियंत्रित करने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले अयवय को परिवर्ती प्रतिरोध कहते हैं। 

धारा नियंत्रक : –

किसी विद्युत परिपथ के प्रतिरोध को परिवर्तित करने के लिए प्रयुक्त युक्ति को धारा नियंत्रक कहते हैं| 

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ओम के नियम के अनुसार विभवांतर तथा धारा के मध्य ग्राफ :- 

R=VI के अनुसार भौतिक अवस्था न बदले तो प्रतिरोध का मान नियत रहता है | अतः ऐसी रेखा जो धारा अक्ष के साथ एक नियत कोण बनाती है | वह नियत प्रतिरोध को प्रदर्शित करते हैं | 

ऐसे कारक जो चालक के प्रतिरोध को प्रभावित करते है :- 

(1) लंबाई :-  किसी चालक की लंबाई बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ता है अर्थात प्रतिरोध लंबाई के समानुपाती होता है | 

R ∝ L

(2)अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल :-  किसी चालक का प्रतिरोध (R) उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है | 

  R ∝ 1A   या  R ∝ 1A    या  R=PLA

जहाँ P एक नियतांक है | जिसे चालक के पदार्थ के वैधुत प्रतिरोधकता कहते हैं और इसका मात्रक ओम मीटर होता है। 

(3) ताप का प्रभाव :- चालक तार का प्रतिरोध ताप के समानुपाती होता है | ताप बढ़ने के साथ-साथ चालक तार का प्रतिरोध बढ़ता है | 

    R ∝ T

प्रतिरोधको की निकाय का प्रतिरोध :- 

  • श्रेणी क्रम संयोजन :-  इस प्रकार के संयोजन में पहले प्रतिरोध का दूसरा सिरा दूसरे प्रतिरोध कि पहले सिरे से और दूसरा सिरा तीसरे सिरे प्रतिरोध के पहले सिरे से जुड़ता है |और यह क्रम निरंतर चलता रहता है |  इस क्रम को श्रेणी क्रम संयोजन कहते हैं |  
  • प्रत्येक प्रतिरोध में धारा का मान सम्मान होता है|और विभवांतर का मान अलग अलग होता है | 

समांतर क्रम संयोजन :- 

इस संयोजन में सभी प्रतिरोधों का एक एक सिरा एक संधि पर और दूसरा सिरा दूसरे संधि पर जोड़ देते हैं | इस प्रकार के संयोजन को समांतर क्रम संयोजन करते हैं | 

जूल का नियम :- 

किसी निश्चित ताप पर किसी प्रतिरोध तार में ऊष्मा उत्पन्न होने की दर उसमें बहने वाली धारा के वर्ग के अथवा चालक के विभवांतर के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है | यही जून का नियम है | 

H=I2RT

विद्युत शक्ति :- 

एक सेकंड में किसी विद्युत उपकरण द्वारा उपभोक्त विद्युत ऊर्जा को उस उपकरण की विद्युत शक्ति कहा जाता है |  इससे प्रायः P सूचित किया जाता है 

  • विद्युत शक्ति का मात्रक वाट होता है |
P=WT

1 वाट :- यदि w=1 जूल, t=1 सेकंड हो तो P=1 यदि किसी परिपथ में 1 सेकंड में 1 जूल ऊर्जा तय होते हैं | तो शक्ति 1 वाट कहलाते हैं | 

Note :- 1 किलोवाट =1000 वाट 

            1 अश्वशक्ति =746 वाट 

किलोवाट घंटा :- 

एक किलोवाट घंटा अथवा एक यूनिट विद्युत ऊर्जा की वह मात्रा है जो 1 किलोवाट की विद्युत शक्ति वाले परिपथ में 1 घंटे में व्यय होती हैं | 

  • 1 किलोवाट घंटा = 3.6*106 जुल 

किसी विद्युत उपकरण में व्यय ऊर्जा = [शक्ति ( समय में) * समय ( घंटा में)1000 ] यूनिट 

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